प्राणायाम और योग स्वास्थ्य के दो अचूक प्रहरी

प्राणायाम शब्द 2 शब्दों से मिलकर बना है – प्राण और आयाम
प्राण अर्थात श्वास और आयाम अर्थात नियंत्रण। इसलिए प्राणायाम का अर्थ हैं, अपनी श्वासों पर नियंत्रण।
साथ ही साथ इसका एक और भाग है जिसे योगासन अथवा योग के नाम से जाना जाता है।
प्राणायाम जहां सांसों को नियंत्रित कर के व्यक्ति के स्नायु तंत्र, श्वसन तंत्र एवं पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है।
वहीं योगासन अस्थि तंत्र एवं मांसपेशियों को मजबूत बनाने का काम करता है।

कुछ प्रमुख प्राणायाम एवं उनके फायदे –

अनुलोम-विलोम

यह प्राणायाम प्रत्येक आयुवर्ग एवं अवस्था के व्यक्ति द्वारा आसानी से किया जा सकता है।
इसे करने के लिए सुखासन अथवा पद्मासन में बैठकर अपनी कमर को बिल्कुल सीधा रखें।
अपने हाथ के अंगूठे से दायें नासिका छिद्र को बन्द कर बाएं छिद्र से सांस को बिल्कुल धीमी गति से गहरा अंदर ले। कुछ देर रोक कर उसे दायीं नासिका से बाहर निकाले।
इस क्रिया को कम से कम 5 मिनट तक करे तथा करते समय मन को शांत रखने का प्रयत्न करे।
यह प्राणायाम श्वसन तंत्र को मजबूत बनाने के साथ नाड़ी तंत्र की किसी भी विकृति को दूर कर अच्छी नींद दिलाने में सहायक हैं।

कपालभांति

यह प्राणायाम व्यक्ति के पाचन तंत्र को मजबूत बनाने के साथ-साथ आंतो के विकारों को दूर करता है।
साथ ही गैस, एसिडिटी आदि विकारों को दूर करने में भी सहायक है।
इसके लिए सुखासन अथवा पद्मासन में बैठकर अंदर भरी हुई श्वास को एक धक्के के साथ बाहर फेंकना होता है।
जिससे कि मूलाधार चक्र, मणिपुर चक्र एवं फेफड़ों पर एक साथ दबाव पड़ता है जो श्वसन तंत्र के साथ-साथ पाचन तंत्र को भी मजबूत करता हैं।
इसे करते समय यह ध्यान रखे कि उच्च रक्तचाप (High Blood Pressure) के रोगी या जिन्हें दिल से संबंधित कोई भी तकलीफ हो, वह इसे धीमी गति से करे अन्यथा नाक से खून आने की समस्या हो सकती है

भस्त्रिका

भस्त्रिका ऐसा प्राणायाम है जो श्वसन तंत्र को मजबूत बनाने का कार्य करता है।
इसे करने के लिए पद्मासन अथवा सुखासन में बैठ जाए एवं कमर को सीधा रखें।
दोनों नासिका छिद्रों से श्वास को लेते हुए उसे पुनः बाहर की ओर छोड़ने का प्रयास करे।
इसे भी न्यूनतम गति से ही करे। शुरू में इस के 2 मिनट के अभ्यास से लेकर इसे 10 मिनट तक किया जा सकता है।

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