चिदंबरम मंदिर तमिलनाडु के चिदंबरम शहर में स्थित है। यह दक्षिण भारत के पुराने मंदिरों में से एक है।
जो तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई से 245 किलोमीटर दूर चेन्नई-तंजावुर मार्ग पर स्थित है।
इस मंदिर के बारे में कहा जाता है कि भगवान शिव ने यहाँ आनंद नृत्य की प्रस्तुति यहीं की थी।
इसलिए इस जगह को ‘आनंद तांडव’ के नाम से भी जाना जाता है।
यह मंदिर भगवान शिव के एक अन्य रूप नटराज और गोविंदराज पेरुमल को समर्पित है।
इस मंदिर के बारे में लोगों का कहना हैं कि देश में बहुत ही कम मंदिर ऐसे हैं, जहां शिव व वैष्णव दोनों देवता एक ही स्थान पर प्रतिष्ठित हैं।
मंदिर में कई काँस्य प्रतिमाएँ हैं, जो सम्भवतः 10वीं-12वीं सदी के चोल काल की हैं।

बनावट

द्रविड़ मंदिर वास्तु शैली में निर्मित चिदंबरम का नटराज मंदिर दक्षिण भारत के मंदिरों में अद्वितीय एवं अप्रतिम हैं।
मंदिर की विशालता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यह 40 एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ है।
इसकी बनावट इस तरह है कि इसके हर पत्थर और खंभे पर भरतनाट्यम नृत्य की मुद्राएं अंकित हैं।
मंदिर के केंद्र और अम्बलम के सामने भगवान शिव माता पार्वती के साथ स्थापित हैं।
चिदंबरम के इस मंदिर में प्रवेश के लिए भव्य नौ मंजिले गोपुरम (द्वार) बने हैं। मंदिर के शिखर के कलश सोने के हैं।
मंदिर में पांच आंगन हैं। इसका सभागृह 1,000 से अधिक स्तम्भों पर टिका है।
स्तंभों व गोपुरों पर मूर्तियाँ तथा अनेक प्रकार की चित्रकारी का अंकन है।
तथा इनके नीचे 40 फुट ऊँचे, 5 फुट मोटे ताँबे की पत्ती से जुड़े हुए पत्थर के चौखटे हैं।

विशेषता

सातवीं शताब्दी से लेकर 16वीं सदी तक चिदंबरम मंदिर के विकास में पांड्य, चोल, विजयनगर के नरेशों, स्थानीय महाजनों तथा जनगण का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
जिन्होंने मंदिर के स्तंभों और दीवारों पर नटराज की नृत्य मुद्रा की प्रतिमाओं को नाट्यशास्त्रीय आधार पर उत्कीर्ण कराया।
चिदंबरम मंदिर में नटराज की तांडव नृत्य की 108 मुद्राएं को भरत के नाट्यशास्त्र में वर्णित भंगिमाओं का मूर्तरूप हैं।
दक्षिण भारत की चिदंबरम मंदिर की मूर्तियां ‘तांडव नृत्य’ करती है।
विश्व के साहित्य एवं कला के इतिहास में ऐसा कोई भी उदाहरण प्राप्त नहीं है।
जिसमें शब्द को आधार मानकर उसके अर्थ की अभिव्यंजना प्रतिमा कला के रूपों में की गई है।
नाट्यशास्त्र पर आधारित कला में चिदंबरम मंदिर में उत्कीर्णित नटराज की शताधिक नृत्य की भंगिमाओं का निर्माण साहित्य एवं कला की दृष्टि से अद्वितीय एवं अप्रतिम है।

महत्व

यह मूर्ति भगवान शिव को भरतनाट्यम नृत्य के देवता के रूप में प्रस्तुत करती है।
इसलिए भरतनाट्यम के कलाकारों में भी इस जगह का कुछ ख़ास महत्व है।
यह उन कुछ मंदिरों में से एक है, जहां शिव को प्राचीन लिंग के स्थान पर मानवरूपी मूर्ति के रूप में प्रतिष्ठित किया गया है।
नटराज शिव की मूर्ति मंदिर की एक अनूठी विशेषता है। नटराज आभूषणों से लदे हुए हैं, जिनकी छवि अनुपम है।
मंदिर की देख-रेख और पूजा-पाठ पारंपरिक पुजारी करते हैं।