भीमकुण्ड – बुंदेलखंड (मध्यप्रदेश)

भीमकुण्ड एक प्रसिद्ध तीर्थ स्थान है, जो मध्यप्रदेश के बुन्देलखण्ड अंचल में ज़िला मुख्यालय से लगभग 80 किलोमीटर की दूरी पर सागर-छतरपुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित है।
यह स्थान आदिकाल से ऋषियों, मुनियों, तपस्वियों एवं साधकों के आकर्षण का केन्द्र रहा है।
वर्तमान समय में यह धार्मिक-पर्यटन एवं वैज्ञानिक शोध का केन्द्र भी बनता जा रहा है।
यह जल कुण्ड वस्तुतः एक गुफ़ा में स्थित है।
कुण्ड के ठीक ऊपर वर्तुलाकार बड़ा-सा कटाव है, जिससे सूर्य की किरणें कुण्ड की जलराशि पर पड़ती हैं।
सूर्य की किरणों में इस जलराशि में मोरपंख के रंगों की आभा झलकती है।
कहा जाता है कि इस कुण्ड में डूबने वाले का मृत शरीर कभी ऊपर नहीं आता, अदृश्य हो जाता हैं।

कुण्ड व मंदिर की बनावट

कुण्ड के प्रवेश द्वार तक जाने वाली सीढि़यों के ऊपरी सिरे पर चतुर्भुज विष्णु तथा लक्ष्मी का विशाल मंदिर बना हुआ है।
भगवान विष्णु अपने तीन हाथों में गदा, चक्र एवं शंख धारण किए हैं तथा एक हाथ अभय मुद्रा में है।
माता लक्ष्मी अपने दाएँ हाथ में कमल के दो अविकसित पुष्प लिए हैं तथा बायाँ हाथ दान मुद्रा में है।
श्वेत पत्थर से निर्मित दोनों प्रतिमाओं के चेहरे पर स्मित-हास का भाव मन में आनन्द का संचार कर देता है।
विष्णु-लक्ष्मी जी के मंदिर के समीप विस्तृत प्रांगण में एक प्राचीन मंदिर स्थित है।
मंदिर के ठीक विपरीत दिशा में एक पंक्ति में छोटे-छोटे तीन मंदिर बने हुए हैं।
जिनमें क्रमशः लक्ष्मी-नृसिंह, राम का दरबार तथा राधा-कृष्ण के मंदिर हैं।

कुण्ड के बारे में मान्यता

भीमकुण्ड के बारे में कुछ लोग यह मानते हैं कि यह शान्त ज्वालामुखी है।
यह पर्वतीय स्थल में गुफ़ा के भीतर कठोर चट्टानों के बीच जलकुण्ड के रूप में स्थित है।
अब तक कई भू-वैज्ञानिकों ने गोताखोरों द्वारा इसकी गहराई का पता लगाने का प्रयास किया है, किन्तु उन्हें कुण्ड का तल नहीं मिला।
कुण्ड के तल के बदले लगभग अस्सी फिट की गहराई में तेज जलधाराएँ प्रवाहमान मिलीं, जो संभवतः इसे समुद्र से जोड़ती हैं।
भीमकुण्ड की गहराई भू-वैज्ञानिकों के लिए आज भी रहस्य बनी हुई है।
यह भी उल्लेखनीय है कि इस जल कुण्ड का जल-स्तर कभी कम नहीं होता है।
वस्तुतः भीमकुण्ड एक ऐसा विशिष्ट तीर्थ स्थल है, जहाँ ईश्वर और प्रकृति एकाकार रूप में विद्यमान हैं।
यहाँ पहुंच कर प्राकृतिक विशेषताओं के रूप में ईश्वर की सत्ता पर स्वतः विश्वास होने लगता है।

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