कुचामन किला (कुचामन शहर, राजस्थान)

राठौड़ शासक ठाकुर जालिम सिंह द्वारा 9वीं शताब्दी में निर्मित, कुचामन शहर नागौर जिले में राजस्थान के पूर्वोत्तर भाग में स्थित है। यह शहर 1100 साल पुराने किले “कुचामन किले” से घिरा हुआ हैं और इसमें कुछ शेखावाटी हवेलियों सहित कई ऐतिहासिक अवशेष हैं।
कुचामन का किला 300 मीटर ऊँचे पर्वत पर बना हैं। यह किला पर्वत के सबसे ऊपरी हिस्से पर स्थित है जैसे कि एक चील का घोंसला होता है। यह किला एक विस्तृत क्षेत्र पर कब्जा करता हैं जिसमें प्रवेश करने के लिए शहर में 10 द्वार बने हैं। पूरी किलेबंदी के आसपास 32 गढ़ थे। उस समय शहर किला परिसर की दीवार के अंदर था और लोग किला परिसर में ही रहते थे। यह किला राजस्थान में राठौड़ शासन के ऐतिहासिक महत्व को दर्शाता है।
किले की बाहरी दीवारों पर लघु चित्रों और भित्ति चित्रों की नक्काशी है। सभी 10 प्रवेश द्वारों पर दो नक्काशीदार बुर्ज बने हुए थे। पहले, शहरवासी सिर्फ किले के भीतरी भाग में रहते थे व बाहरी क्षेत्र निर्जन था। हालाँकि, वर्तमान में, शहर किले की दीवारों से परे फैल गया है और शहर की उचित सेवाओं, स्कूलों, कॉलेजों, अस्पतालों, कार्यालयों, अच्छी सफाई व्यवस्था, अच्छी तरह से बनी सड़कों और अन्य सुविधाओं से शहर का आधुनिकीकरण किया गया है। यह शहर अब काफी आबादी वाला है और इसे राजस्थान के प्रमुख पर्यटक स्थानों में से एक माना जाता है।
किले की आंतरिक दीवारों पर कांच, अर्ध-कीमती पत्थरों और सोने की नक्काशी की गई है। इन सजावटों को करने के लिए प्राकृतिक सूखे फूलों से बने रंगों का इस्तेमाल किया गया, जिससे इस स्थान की सुंदरता बढ़ गई। किले के मुख्य हॉल की छत, जिसे दरबार-ए-ख़ास भी कहा जाता है, को सभी राठौर शासकों के चित्रों के साथ चित्रित किया गया है। इसके अलावा, प्रत्येक कमरे की छत पर सुंदर नक्काशी की गई है।

दीवारों और स्तंभों को रूपांकनों और फूलों की सोने की कलाकृतियों और अद्भुत भित्तिचित्रों से चित्रित किया गया है। किले में विभिन्न क्षेत्रों में खूबसूरती से खींची गई प्राचीन हिंदू पौराणिक कहानियों को देखना विस्मयकारी है। राठौड़ कबीले का मुख्य कला रूप लघु चित्रकारी था, जिसे विभिन्न स्थानों पर भी देखा जा सकता है। हैंगिंग टैरेस और लंबी बालकनियों में उस युग की स्थापत्य कला की विशेषता है। किले में शीशे से बना एक महल भी है, जिसे शीश महल कहा जाता है, जो पूरी तरह से विभिन्न आकार, डिजाइन और लंबाई के शीशों से बना हुआ है।
किले को अब एक लक्जरी हेरिटेज होटल में बदल दिया गया है लेकिन किसी भी प्राचीन वास्तुशिल्प को नहीं छुआ गया था। होटल के अधिकारियों ने इस बात का अत्यधिक ध्यान रखा हैं कि पर्यटक प्राचीन काल की शाही विलासिता का आनंद लें सके।
यह होटल 47 लक्ज़री सुइट्स के साथ 11 सिंगल डीलक्स और 36 डबल डीलक्स कमरों से सुसज्जित है। होटल बर्ड वॉचिंग, हॉर्स सफारी और कैमल सफारी की सुविधा भी प्रदान करता है। कुचामन के स्वर्ण युग के अमर इतिहास और आकर्षक शाही माहौल को पर्यटकों द्वारा हेरिटेज होटल में रहकर फिर से जीया जा सकता है।
कहा जाता है कि यहां जोधपुर के राजा की सोने-चांदी की टकसाल थी।
इस किले को देखने के लिए पर्यटकों को सीधी चढ़ाई चढ़ने की बजाय बैक गियर में जीप को उल्टा ले जाना पड़ता है। रोचक यह है कि इसके लिए चालकों को विशेष तौर पर प्रशिक्षण लेना पड़ता है। सन् 2000 में यहां होटल शुरू होने के बाद विदेशी पर्यटकों का रुझान बढ़ा तो फोर्ट तक वाहन पहुंचाने की कवायद शुरू की गई। यहां आधी दूरी तक सीधे और फिर रिवर्स में वाहन को चढ़ाना पड़ता है।

ये किला बारिश के पानी को बचाने का अद्भुत मॉडल है। यहां बारिश के पानी की एक बूंद भी बेकार नहीं जा सकती। यही कारण है कि यह मॉडल आज भी जल संरक्षण के क्षेत्र में कारगर साबित हो रहा है। यहां बारिश के पानी को एकत्रित करने के लिए विशालकाय 17 हौद बने हुए हैं। वहीं एक किले के भीतर बावड़ी बनी हुई है। इसके अलावा किले के पीछे यानी उत्तर की ओर से पहाड़ी पर प्राचीन बावड़ी के अवशेष भी नजर रहे हैं। यह प्राचीन बावड़ी किले के निर्माण से भी पहले निर्मित है। इन सभी स्रोतों के माध्यम से करीब 1 करोड़ लीटर पानी का स्टोरेज हो सकता है।
जलदाय विभाग के आंकड़ों के अनुसार देखें तो आज के कुचामन को एक दिन की पानी की जरूरत (95 लाख लीटर) को पूरा किया जा सकता है। इन सबके बीच खास बात यह है कि किले के अंदर जो वॉटर हार्वेस्टिंग का सिस्टम उस जमाने में डवलप किया गया था वह निसंदेह बेमिसाल है।
वॉटर हार्वेस्टिंग के बेहतर मॉडल के रूप में विकसित किले की इस प्रणाली में किसी प्रकार की मशीन का उपयोग नहीं होता बल्कि सबसे पहले किले के उत्तरी हिस्से में बने हौद नंबर 1 में पानी पहुंचता है, यह हौद पूरा भरने के बाद क्रमिक रूप से ओवरफ्लो होकर दूसरे हौद में पानी पहुंचता है। सभी हौद भरने के बाद ही यहां का पानी किले के बाहर छोड़ा जाता है।
इस किले में बने सभी 17 हौद भूमिगत यानी अंडरग्राउंड चैनल (पाइप नहीं) जिसे दूसरे शब्दों में नाली कह सकते हैं, से जुड़े हुए हैं। उस जमाने में संभवत: पाइप उपयोग में नहीं आते थे तो फर्श में कवर्ड गहरी और वाटरप्रूफ नाली के माध्यम से एक हौद से दूसरे हौद तक वर्षा का पानी पहुंचता था। वहीं इसके कारण बारिश का पानी व्यर्थ नहीं जाता था।

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